भारत में अपनी तरह के पहले एंटी-माइक्रोबियल ग्‍लव्‍स – ‘ट्रूशील्ड एएमजी’ के साथ हेल्दियम मेडटेक ने पेश किया छह महीनों में अपना तीसरा इनोवेशन

 भारत और अमेरिका में 52 पेटेंट के साथ वैश्विक स्तर पर स्वदेशी तकनीकी को प्रोत्साहन देते हुए एक ‘आत्मनिर्भर भारत’ की ओर अपने समर्थन को मजबूत किया



भारत की सबसे बड़ी चिकित्सा उपकरण कंपनियों में से एक हेल्दियम मेडटेक ने अपनी
तरह के पहले एंटी-माइक्रोबियल ग्‍लव्‍स, ट्रूशील्ड के लॉन्च की घोषणा की। कर्नाटक के कुनिगल में निर्मित, ये
एंटी-माइक्रोबियल ग्‍लव्‍स (एएमजी) क्वाटरनरी अमोनियम कंपाउंड का इस्‍तेमाल कर एक पेटेंट टेक्‍नोलॉजी
से बने हैं, जो रोगाणुओं को मारता है और हेल्थकेयर पेशेवरों (एचसीपी) और रोगियों को 8 घंटे तक 99.99
फीसदी सुरक्षा प्रदान करता है।
एंटी-माइक्रोबियल ग्‍लव्‍स पिछले छह महीनों में SN2355 द्वारा किया गया तीसरा खोजपरक लॉन्‍च है।
कंपनी ने ट्रूग्‍लाइड SN2355 लॉन्च किया था, जो खासकर कोमोक एमजी के लिए बनाया गया सुइयों का एक
संयोजन है, जो पोस्टपार्टम हेमरेज (PPH) का प्रबंधन करने के लिए एक आधुनिक शल्य तकनीक है, और जो
मातृत्व मृत्युदर बढ़ने की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। SN2355 ने भारत में कंधे के उपचार से जुड़ी
आर्थ्रोस्कोपिक उपकरणों की सबसे बड़ी श्रेणी भी लॉन्च की है, जो सरल और फंक्‍शनल पेटेंट डिजाइनों के
माध्यम से आर्थोस्कोपी सर्जनों को लाभ पहुंचा रही है। भारत और अमेरिका में कंपनी के पास 52 पेटेंट हैं।
हेल्दियम समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक, अनीश बाफना इस अवसर पर कहते हैं, “हम भारत में
अपनी पांच फैसिलिटीज में देशी मेडिकल उपकरणों का उत्‍पादन कर रहे हैं और इनोवेटिव प्रिसीशन के माध्‍यम से
चिकित्‍सा बिरादरी के लिए इन उपकरणों को सरल करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। भारत में 85% चिकित्सा
उपकरण आयात किए जाते हैं। US FDA(510k), CE और ISO अनुमोदन और भारत व अमेरिका में 52 पेटेंट के
साथ वैश्विक मानकों का अनुपालन करने वाली एक भारतीय इकाई के रूप में, हम आयातित प्रौद्योगिकी पर निर्भरता को
कम करने और एक आत्मनिर्भर भारत का समर्थन करने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। ट्रूशील्ड एएमजी के लॉन्च के
साथ, हम उन हाथों की रक्षा करना चाहेंगे, जो लोगों की जिंदगियां बचाते हैं।”


आज जो सर्जिकल ग्‍लव्‍स उपलब्ध हैं, वे संपूर्ण सुरक्षा प्रदान नहीं करते हैं क्योंकि वे केवल एक निष्क्रिय
अवरोधक के रूप में कार्य करते हैं। 1 डॉक्टर विशेष जोखिम 2 पर होते हैं, क्योंकि उनका काम उन रोगियों के
साथ निकट संपर्क की मांग करता है, जो रोगजनक रोगाणुओं (पैथोजेनिक माइक्रोब्‍स) को शरण दे सकते हैं।
सर्जरी के दौरान ग्‍लव्‍स फट जाने पर जब कार्यरत सर्जनों का ध्यान नहीं जाता है, तो सर्जन के साथ-साथ
रोगियों के लिए भी एक गुप्त जोखिम 3 खड़ा हो जाता है। यहां तक कि सर्जरी से पहले स्क्रबिंग की
प्रभावकारिता तीन घंटे में फीकी पड़ने लगती है और सर्जरी में पांच 4 घंटे बाद संक्रमण स्क्रब से पहले वाली
हालत में पहुंच जाता है। इससे सर्जन और मरीज दोनों के लिए खतरा पैदा हो जाता है।
हेल्दियम मेडटेक के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक मोहराना लॉन्च के अवसर पर कहते हैं, “अध्ययनों से पता
चला है कि जहां की सर्जरी की जा रही हो, वहां के संक्रमण हेल्थकेयर से जुड़े सभी संक्रमणों (एचएआई) के 15 फीसदी
और एचएआई में सर्जिकल रोगियों के 37 फीसदी 5 होते हैं, जो मरीजों की जिंदगी को जोखिम में डालते हैं। दूसरी ओर,
45 फीसदी से ज्यादा सर्जनों के उस हाथ का दस्ताना पहले फटता है जिसे वे कम इस्‍तेमाल करते हैं और केवल 25


फीसदी 3 सर्जन सर्जरी के दौरान दस्ताने में आई इस कमी को नोटिस करते हैं, जिससे एचसीपी के लिए एक गुप्त जोखिम
पैदा हो जाता है। एक विस्तारित अवधि के लिए संपर्क संचरण से सुरक्षा बढ़ाना आज की आवश्यकता है, जिसे पूरा करने
के लिए, हमने ट्रूशील्ड एंटी-माइक्रोबियल ग्‍लव्‍स लॉन्च किए हैं। यह अपनी तरह का एक अनूठा और प्रभावी समाधान है
जो एचसीपी और रोगियों दोनों को रोगाणुओं की एक श्रृंखला से बचाता है। ट्रूशील्ड एएमजी को कुछ इस तकनीक से
बनाया गया है कि यह 8 घंटे तक 99.99फीसदी रोगाणुओं से सुरक्षा प्रदान करता है। ”
एसवीपी - कमर्शियल, हेल्दियम मेडटेक, एहसान हक कहते हैं, “हेल्दियम में सहयोग एक प्रमुख मूल्य है;
लॉकडाउन के दौरान ट्रूशील्ड एएमजी को लॉन्च करना सर्जनों और उनके मरीजों के सफल परिणामों में
भागीदारी के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को साबित करता है। ‘पहुंच में सुधार’ हमारा लक्ष्य है; ट्रूशील्ड एएमजी
हेल्दियम टीम द्वारा समर्थित है और भारत में 500 से अधिक कस्बों और शहरों को कवर करते हुए हमारे
व्यापक वितरण तंत्र के माध्यम से उपलब्ध है।”


स्रोत
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4. Hosseini, P., Mundis, G.M., Eastlack, R. et al. Do Longer Surgical Procedures Result in Greater Contamination of
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5. Prevention of Hospital Acquired Infections: A practical Guide 2nd edition. Editors G Ducel, J Gabry and L Nicolle.
Published by World Health Organisation 2002.