टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने अपनी तरह के पहले सोशल ऐकेडमी ऑफ लर्निंग बाई टोयोटा (एसएएलटी) की शुरुआत की

टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने अपनी तरह के पहले सोशल ऐकेडमी ऑफ लर्निंग बाई टोयोटा (एसएएलटी) की शुरुआत की ताकि मुनाफा न कमाने वाले संगठनों को प्रशिक्षण दिया और सशक्तिकरण किया जा सके



बैंगलोर :टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने सीएसआर के क्षेत्र में बेहतर इकोसिस्टम तैयार करने के लिए निरंतर चल रहे अपने आउटरीच में अपनी तरह के पहले,ऐकेडमीऑफलर्निंगबाईटोयोटा (एसएएलटी) पेश करने की घोषणा की है। इस प्रोग्राम से टोयोटा का लक्ष्य एनपीओ की क्षमता का और विकास करना है। इसके अलावा, उच्च गुणवत्ता वाला प्रबंधन तथा टोयोटा शैली का पालन करते हुए में कार्य उत्कृष्टता सुनिश्चित करना है। टोयोटा द्वारा सोशल ऐकेडमी ऑफ लर्निंग का अब तक का पहला पांच दिन का आवासीय आयोजन 2 से 7 फरवरी 2020 तक बिडाडी स्थित टोयोटा प्लांटमें किया जाएगा। यह आयोजन केपीएमजी इंडिया और कॉमन परपस इन इंडिया द्वारा किया जाएगा।


एसएएलटी या साल्ट की अवधारणा अग्रणी एनपीओ (मुनाफा न कमाने वाले संगठनों) के विकास के लिए बनाई गई है ताकि वे ज्यादा उद्यमी, रणनीतिक और उच्च प्रदर्शन वाले बन सकें ताकि बड़े पैमाने पर सामाजिक बदलाव ला सकें। भिन्न उद्देश्यों के लिए काम करने वाले एनबीओ से इसे अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। पायलट प्रोग्राम का लक्ष्य एनपीओ के वरिष्ठ लोगों के लिए एक उपयुक्त मंच बनना है जहां वे अपनी चुनौतियां बता सकें, सर्वश्रेष्ठ व्यवहारों का पता लगा सकें और समूह के अंदर सेक्टर के विशेषज्ञों तथा साथियों की शक्ति बढ़ाकर क्षमता का विकास कर सकें। सत्र के दौरान कई क्षेत्रों को जानने समझने की कोशिश  जाएगी। इनमें प्रोजेक्ट प्लानिंग, टैक्स और नियमन, ब्रांडिंग और संचार, निरंतरता और निगरानी तथा मूल्यांकन शामिल है जिसके परिणामस्वरूप परियोजना की प्रभावी डिलीवरी संभव होती है।


भाग लेने वाले एनपीओ का चुनाव भिन्न प्राचलों पर हुआ जैसे सुविज्ञता, सेवा के वर्ष, धन का प्रवाह और धन मुहैया कराने की शैली तथा निगमन से संबंधित संपूर्ण दस्तावेज। प्रशिक्षण के अंत में नतीजे और प्रक्रिया उन्मुख सत्र से एनपीओ को फायदा होगा और इसकी एक विस्तृत आकलन रिपोर्ट तैयार की जाएगी जिसमें वे खुद का और अपने संस्थान का मूल्यांकन कर सकेंगे। इस तरह उन्हें बाजार में अपनी स्थिति बनाने में सहायता मिलेगी। 


 इस खास लर्निंग प्रोग्राम की शुरुआत पर टिप्पणी करते हुए टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, वाह्य मामले, कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी और जनसंपर्क, श्री विक्रम गुलाटी ने कहा,"टोयोटा किर्लोस्कर मोटर में सामाजिक योगदान गतिविधियां हमारे कारोबारी डीएनए का अहम भाग है। सन 2000 से हम समाज के समग्र विकास पर ध्यान देते रहे हैं और भिन्न एनजीओ साझेदारों के साथ


साझेदारी की है ताकि एकदम जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने का प्रभाव सुनिश्चित किया जा सके। समाज को शिक्षित करने और हमारे सीएसआर हस्तक्षेप में सुविधाओं के रख-रखाव के लिए समाज को जिम्मेदार बनाने में एनपीओ की अहम भूमिका रही है। ऐसे में भाग लेने वाले देश भर एनपीओ के लिए इस लर्निंग और ट्रेनिंग प्रोग्राम की शुरुआत करते हुए हमें खुशी हो रही है। सोशल ऐकेडमी ऑफ लर्निंग बाई टोयोटा” एक अनूठा तरीका है जिसका मकसद एनपीओ को आवश्यक पेशेवर कौशल से युक्त करना है ताकि वे अपने संस्थान का प्रभावी विकास और प्रबंध कर सकें। इसका असर यह होगा कि समाज को मिलने वाला बेहतर ढंग से डिलीवर होगा। यह अच्छा प्रभाव डालने वाले प्रासंगिक संगठनों तक पहुंचने की हमारी कोशिश है। न्यूनतम प्रभाव वाले किसी एक प्रोजेक्ट पर ध्यान देने की बजाय हम बड़ी संख्या में एनपीओ की डिलीवरी की गुणवत्ता को बेहतर करने के लक्ष्य पर काम करते हैं जिससे हम एक विस्तृत समूह में अंतर लाने की उम्मीद करते हैं।” 


संस्थान का आकलन पहले और बाद में भी किया जाएगा तथा अंतर के विश्लेषण की रिपोर्ट दी जाएगी ताकि अपने स्तर पर वे प्रक्रियाओं को बेहतर बनाएं। संबंधित संस्थान इंप्लीमेंटेशन रिपोर्ट जमा करेंगे जिसका मूल्यांकन किया जाएगा और प्रदर्शन के अनुसार मान्यता दी जाएगी।


भारत की द्रुत प्रगति और निर्माण क्षेत्र के उभरने से स्थितियां बदली हैं और सीएसआर नियमों के अनुपालन तथा 2030 के स्थायी विकास लक्ष्य और इस तरह सामाजिक क्षेत्र के लिए धन मुहैया कराने की शैली को प्रेरित करने पर जोर देने के कारण बने हैं। इस बदलाव को महसूस करते हुए टोयोटा ने एसएएलटी की योजना बनाई ताकि जागरूक और प्रभावी अग्रणियों का विकास किया जा सके जो बड़े पैमाने पर सामाजिक बदलाव ला सकें।


भारत में टोयोटा किर्लोस्कर मोटर की दो दशक की शानदार यात्रा रही है और इस पूरी यात्रा के दौरान कंपनी ने समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए भिन्न सीएसआर पहल की है और स्थायी समाधानों के जरिए उनका समर्थन किया। कंपनी लगातार समाज के सद्भावनापूर्ण, विस्तार योग्य और स्थायी विकास के लिए काम करती रही है और शिक्षा, स्वास्थ्य और हाईजीन, सड़क सुरक्षा, पर्यावरण और कौशल विकास के लिए भिन्न सीएसआर पहल के जरिए जोर देती रही है। इस तरह के सीएसआर का प्रभाव व्यक्ति के जीवन में बड़े बदलाव के रूप में दिखना चाहिए जिससे सब कुछ ठीक होने का पता चले।


टोयोटा के लिए स्थापना के समय से ही सीएसआर एक अभिन्न भाग रहा है जो 2001 से चल रहा है। टीकेएम को हाल में सीएसआर और ससटेनेबिलिटी (स्थायित्व या निरंतरता) के लिए 10 वां स्थान मिला है। रिपोर्ट, ‘रेसपांसिबल बिजनेस रैंकिंग्स’ के अनुसार यह मान्यता मिलना कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के तहत टोयोटा के प्रशंसनीय प्रयासों की प्रशंसा है। यह इसकी सैनिटेशन परियोजनाओं के जरिए सामाजिक तौर पर जिम्मेदार और स्थायी सोसाइटी बनाने के लिए है।


इसके अलावा टीकेएम अपनी कारोबारी और सामाजिक प्रतिबद्धताओं को जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और इसका लक्ष्य प्रकृति के साथ सद्भाव में जीना है तथा कई अन्य जीवन को समृद्ध बनाना है। इसके लिए विविधतापूर्ण आवश्यकता वाले समाज में एक स्थायी ढंग से खुशी आती है।


टीकेएम एक नजर में


























कंपनी का नाम



टोयोटा किर्लोस्कर मोटर प्राइवेट लिमिटेड



इक्विटी भागीदारी



टीएमसी : 89%, किर्लोस्कर सिस्टम्स लिमिटेड (श्री विक्रम एस किर्लोस्कर) : 11%



कर्मचारियों की संख्या



लगभग 6,500 +



क्षेत्रफल



करीब 432 एकड़ (लगभग 1,700,000 वर्ग मीटर)



निर्मित क्षेत्र



74,000 वर्ग मीटर



 


टीकेएम का पहला प्लांट एक नजर में:






















स्थापित



अक्तूबर 1997 (उत्पादन शुरू : दिसंबर 1999)



स्थान



बिडाडी



उत्पाद



इनोवा, फॉरच्यूनर भारत में बनाए जाते हैं। प्राडो, लैंड क्रूजर और प्रायस का आयात सीबीयू के रूप में किया जाता है।



स्थापित उत्पादन क्षमता



1,00,000 यूनिट तक




टीकेएम का दूसरा प्लांट एक नजर में:






















उत्पादन शुरू



दिसंबर 2010



स्थान



टोएटा किर्लोस्कर मोटर प्राइवेट लिमिटेड, बिडाडी के साइट पर



उत्पाद           



कॉरोला, अल्टिस, इटियॉस, इटियॉस लिवा, इटियॉस क्रॉस, कैमरी और कैमरी हाईब्रिड



स्थापित उत्पादन क्षमता



2,10,000 यूनिट तक